इन शेरों को पढ़कर देशभक्ति में डूब जाता है हर एक देशवासी.

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्टी से भी खुशबू-ए-वफा आएगी.

लाल चन्द फलक

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है.

बिस्मिल अजीमाबादी

हम अम्न चाहते हैं मगर जुल्म के खिलाफ, गर जंग लाजमी है तो फिर जंग ही सही.

 साहिर लुधियानवी

सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा, हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसितां हमारा.

अल्लामा इकबाल 

वतन की रेत जरा एड़ियां रगड़ने दे, मुझे यकीं है कि पानी यहीं से निकलेगा.

मुजफ्फर वारसी

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है, उछल रहा है जमाने में नाम-ए-आजादी.

फिराक गोरखपुरी