Sheetala Ashtami Puja: शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म के लिए बहुत खास और शुभकारी माना जाता है. यह पर्व इस साल कल यानि कि 22 मार्च को मनाया जाएगा. तो चलिए आपको बताते हैं माता शीतला की पूजा विधि, मंत्र, नियम और सामग्री के बारे में.
Sheetala Ashtami Puja: शीतला अष्टमी का पर्व देश के अलग-अलग राज्यों में मनाया जाता है. जिसे कई जगह बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है. बता दें कि देश के कुछ हिस्सों में सप्तमी के दिन और कुछ हिस्सों में अष्टमी तिथि के दिन माता शीतला की पूजा की जाती है. आमतौर पर इसे चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. वहीं, इस साल ये खास तिथि 22 मार्च की सुबह 4 बजकर 23 मिनट से शुरू हो रही है, जो अगले दिन यानी 23 मार्च की सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. वहीं पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 23 मिनट से शाम 06 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.

शीतला अष्टमी पूजा की विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
- अपने घर और पूजन स्थल को साफ कर लें.
- माता शीतला की प्रतिमा को स्नान कराएं.
- इसके बाद माता को जल, अक्षत, हल्दी, रोली, फूल और चंदन अर्पित करें.
- फिर बासी भोजन यानि की बासौड़ा से माता का भोग लगाएं.
- इसके बाद घी के दीपक जलाएं और परिवार के साथ मां शीतला की आरती करें.
माता के लिए भोग
इस दिन माता शीतला को भोग में बासी भोजन के अलावा बासी हलवा, पूड़ी, बाजरे की रोटी और मालपुए आदि का भोग लगाया जाता है. मान्यता है कि माता को भोग में ठंडी यानी बासी चीजें पसंद है.

पूजा का मंत्र
शीतला माता की पूजा करते समय ‘ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः’ मंत्र का जाप करें. इसका अर्थ है रोहतक के माता दरवाजा चौक पर प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर में। जय शीतला माता की.
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