रिजर्व बैंक (RBI) 9 अप्रैल को ब्याज दर में कमी कर सकता है. केंद्रीय बैंक के मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC)की बैठक 7 अप्रैल को शुरू होगी. इसके बाद कार और घर खरीदने की योजना बनाएं.
NEW DELHI: रिजर्व बैंक (RBI) 9 अप्रैल को इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है. केंद्रीय बैंक के मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 7 अप्रैल को शुरू होगी. इसके नतीजों का ऐलान केंद्रीय बैंक 9 अप्रैल को करेगा. उस दिन नजरें इस पर होंगी कि मॉनेटरी पॉलिसी में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा क्या कहते हैं. घर और कार खरीदने का प्लान बना रहे लोगों को 9 अप्रैल को खुशखबरी मिल सकती है. RBI इंटरेस्ट रेट घटा सकता है .
अनुमान है कि केंद्रीय बैंक 9 अप्रैल को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपे रेट में और 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकता है. सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए नीतियों को उदार बनाने का आग्रह कर रही है. भारतीय रिजर्व बैंक का नया गवर्नर बनते ही गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेट कट की खुशखबरी दी थी. अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि लोन की ब्याज दरें और भी घटने वाली हैं. अधिकारियों का कहना है कि मुद्रास्फीति में कमी आने से अब दरों में कटौती की गुंजाइश बन रही है.
रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा सकता है बैंक
हालांकि आरबीआई को कोई प्रत्यक्ष निर्देश नहीं दिया गया है, लेकिन बीते दो महीनों में बैंक अधिकारियों और आरबीआई के बीच बैठकें हुई हैं, जिनमें क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट को लेकर चिंता जताई गई है. इससे संकेत मिलता है कि आरबीआई फिर से रेट कट का मन बना रहा है या बना चुका है. विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई 9 अप्रैल की अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट और घटा सकता है.
आरबीआई ने दो साल बाद 7 फरवरी को 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी जिससे रेपो रेट 6.25 पर आ गया. आरबीआई गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा के पहले 100 दिन विकासोन्मुख नीतियों से भरे रहे. दिसंबर में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने पांच वर्षों में पहली बार ब्याज दरों में कटौती की. बैंकिंग प्रणाली में लगभग 60 अरब डॉलर की नकदी डाली और बैंक ऋण नियमों को आसान किया. मल्होत्रा का यह दृष्टिकोण उनके पूर्ववर्ती शक्तिकांत दास से बिल्कुल अलग है, जिन्होंने दो वर्षों तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था ताकि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखा जा सके. लेकिन सरकार ने इस सख्त रुख को आर्थिक सुस्ती के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था.
वित्त मंत्रालय ने अपनी मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा कि विकास को गति देने के लिए सरकार की ओर से सहयोगात्मक कदम और आरबीआई की नरम मौद्रिक नीति एक साथ काम करेंगे. मल्होत्रा ने भी अपने पहले मौद्रिक नीति वक्तव्य में कहा था कि ‘महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए मौद्रिक नीति को सक्रिय रहना होगा.’ मल्होत्रा ने बैंकों के लिए तरल परिसंपत्तियों की न्यूनतम सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया और नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को दिए जाने वाले ऋण पर जोखिम भार को घटाया है. इन दोनों उपायों का मकसद ऋण प्रवाह को बढ़ावा देना है.
सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसके लिए 8% से अधिक की विकास दर जरूरी मानी जा रही है. अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि आगामी मौद्रिक नीति बैठक में आरबीआई नीतिगत रुख को ‘समर्थनकारी’ घोषित कर सकता है.
आरबीआई ने पिछले 2 महीनों में बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹15.5 लाख करोड़ डाल दिए हैं. ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से बॉन्ड बाजार में तेजी है और 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 6.58% के तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है. विदेशी निवेशकों ने इस साल अब तक ₹5.9 अरब डॉलर के भारतीय बॉन्ड खरीदे हैं, भले ही उन्होंने ₹14.7 अरब डॉलर की इक्विटी बेची हो. अगर अनुमान सही रहे और आरबीआई ने 9 अप्रैल को रेट कट की घोषणा कर दी तो होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन समेत तमाम तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. बैंक रेपो रेट के अनुसार ही कर्ज पर ब्याज दरें तय करते हैं. वर्तमान रेपो रेट 6.25% से घटा तो बैंकों को अपने ग्राहकों को लोन पर ब्याज घटाने ही होंगे.
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