Home Cultural बिहार के इस बाजार में बिकते हैं दूल्हे, विदेश से वर खरीदने आते हैं लोग; शर्तें जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

बिहार के इस बाजार में बिकते हैं दूल्हे, विदेश से वर खरीदने आते हैं लोग; शर्तें जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

by Rashmi Rani
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groom market in bihar

Grooms Market : बिहार के मधुबनी में एक ऐसा मेला लगता है, जहां बाजार दूल्हों से सजता है. इस मेले में हर जाति धर्म के दूल्हे आते हैं और लड़की वाले उनकी वर का चुनाव करते हैं.

27 May, 2024

Grooms Market : सदियों से चली आ रही दहेज कुप्रथा 21 सदी में भी जारी है. यूपी और बिहार जैसे प्रदेशों में इसका चलन सबसे ज्यादा है. बिहार की बात करें तो मधुबनी जिले में एक ऐसा मेला भी लगता है, जहां सब्जी और फल की तरह दूल्हे खरीदे जाते हैं. इस मेले में हर जाति धर्म के दूल्हे आते हैं और लड़की वाले उनकी वर का चुनाव करते हैं, जिसकी बोली सबसे ज्यादा होती है दूल्हा उसका हो जाता है.

9 दिनों तक चलता है मेला

इस दूल्हे की मंडी को सौराठ सभा यानी दूल्हों का मेला कहा जाता है. यह मेला 22 बीघा जमीन पर 9 दिनों तक चलता है. कई लोग इसे सभागाछी के नाम से भी जानते हैं. इस मेले में न केवल देश बल्कि विदेश से भी लड़कियों पैरेंट्स आते हैं और योग्य वर का चुनाव करते हैं. इसके बाद चट मंगनी और पट विवाह कर अपने साथ लेकर चले जाते हैं. दूल्हे की योग्यता के अनुसार उसकी सौदेबाजी भी की जाती है.

कोई भी संबंध पाए जाने पर नहीं होती शादी

इस मेले में सबसे अहम भूमिका पंजीकारों की होती है. जो भी यहां रिश्ते तय होते हैं, उसे मान्यता पंजीकार ही देते हैं. इस मेले की खास बात यह है कि पिता पक्ष और ननिहाल पक्ष के 7 पीढ़ी तक संबंध को देखा जाता है और अगर कोई भी संबंध पाया जाता है तो उन्हें विवाह करने की अनुमति नहीं है.

700 साल पहले हुई थी इसकी शुरुआत

कहा जाता है कि 700 साल पहले इस मेले की शुरुआत की गई थी. ऐसा माना जाता है कि इस सौराठ सभा की शुरुआत कर्नाट वंश के राजा हरि सिंह ने की थी. इसका उद्देश्य यह था कि अलग-अलग गोत्र में शादी हो सके और दहेज प्रथा को खत्म किया जा सके. साल 1971 में इस मेले में लगभग 1.5 लाख लोग आए थे, लेकिन अब धीरे-धीरे यहां आने वाले लोगों की संख्या कम होती जा रही है.

अब नहीं होता दहेज रहित विवाह

जहां दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी, लेकिन समय के साथ इसमें भी कुछ विकृतियां आ गई हैं. अब यहां दहेज रहित विवाह नहीं होता है, बल्कि इसके उलट इस मेले में लड़की पक्ष वाले वर के योग्यतानुसार मूल्य निर्धारित करते हैं. जैसी बोली वैसा दूल्हा. इसके कारण इस मेले का महत्व खत्म हो गया है.

25 जून से आरंभ होगा मेला

बता दें कि इस साल यह मेला 25 जून से आरंभ होकर 3 जुलाई तक चलेगा. इस मेले में इस बार भारत और नेपाल के अलावा आसपास के देशों से लोगों की आने की संभावना है. मेले को लेकर प्रशासन की ओर से भी पूरी तैयारी कर ली गई है. मंडी के पंज‍ीकार ने बताया कि इस मेले में अब ब्राह्मण का विवाह भी दूसरे जाति में होने लगा है.

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