Home Environment International Day for Biological Diversity: कैसे हुआ पंखों का विकास, इस रहस्य को जानने के लिए बढ़ाते हैं एक कदम आगे

International Day for Biological Diversity: कैसे हुआ पंखों का विकास, इस रहस्य को जानने के लिए बढ़ाते हैं एक कदम आगे

by Preeti Pal
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Biological Diversity

International Day for Biological Diversity: पुराने समय से ही इंसान पंखों से खेलता रहा है. इसके बावजूद भी हम पंखों के बारे में कितना जानते हैं?

22 May, 2024

International Day for Biological Diversity: मजबूत लेकिन हल्के, सुंदर संरचना वाले पंखों के बारे में आप कितना जानते हैं? वहीं, नए अध्ययन में पाया गया कि पंख वाले पहले जानवरों में से कुछ की त्वचा भी सरीसृपों की तरह पपड़ीदार थी. 1996 में पहले पंख वाले डायनासोर, सिनोसॉरोप्टेरिक्स प्राइमा की शुरुआत के बाद, पंख विकास की एक और दिलचस्प तस्वीर चित्रित की गई है.

ज्यादा आकार के पंख

कई डायनासोर और उनके उड़ने वाले चचेरे भाई टेरोसॉर के पंख होते थे. अतीत में पंख ज्यादा आकार में आते थे. उदाहरण के लिए, विस्तारित सिरे वाले रिबन जैसे पंख डायनासोर और विलुप्त पक्षियों में पाए जाते थे लेकिन आधुनिक पक्षियों में नहीं. सिर्फ कुछ प्राचीन प्रकार के पंख ही आज पक्षियों को विरासत में मिले हैं. पुराजीव विज्ञानियों का तो ये भी कहना है कि शुरुआत में पंख उड़ने के लिए नहीं बनाए गए थे. उनका मानना है कि पंख जीवाश्मों में सरल संरचनाएं और शरीर पर विरल वितरण थे, इसलिए वे प्रदर्शन या फिर स्पर्श संवेदन के लिए रहे होंगे. टेरोसॉर जीवाश्मों से पता चलता है कि उन्होंने रंग पैटर्निंग में भी कितनी अहम भूमिका निभाई होगी. ये जीवाश्म प्राचीन पंखों के विकास की कहानी का केवल एक हिस्सा बताते हैं. बाकी क्रिया त्वचा में हुई.

पक्षी जैसी त्वचा

संरक्षित त्वचा वाले चार जीवाश्मों के 2018 के अध्ययन से पता चला है कि शुरुआती पक्षियों और उनके करीबी डायनासोर रिश्तेदारों (कोइलूरोसॉर) की त्वचा पहले से ही आज के पक्षियों की त्वचा के समान थी. पक्षी जैसी त्वचा डायनासोर के अस्तित्व में आने से पहले विकसित हुई थी. अध्ययन से पता चलता है कि कम से कम कुछ पंख वाले डायनासोरों की त्वचा आज भी सरीसृपों (reptiles) की तरह पपड़ीदार थी. इसके सबूत सिटाकोसॉरस के एक नए नमूने से मिलता है, जो एक सींग वाला डायनासोर है जिसकी पूंछ पर बाल जैसे पंख होते हैं.

केराटिन से बनी त्वचा

सरीसृप शल्क कठोर होते हैं क्योंकि वे एक प्रकार के प्रोटीन, कठोर कॉर्नियस बीटा प्रोटीन से भरपूर होते हैं. इसके साथ ही पक्षियों की मुलायम त्वचा एक अलग प्रोटीन प्रकार, केराटिन से बनी होती है, जो बाल, नाखून, पंजे, खुर और हमारी त्वचा के बाहरी भाग में प्रमुख संरचनात्मक सामग्री होती है. पिछले 30 सालों में, जीवाश्म रिकॉर्ड ने पंखों के विकास के संबंध में वैज्ञानिकों को आश्चर्यचकित कर दिया है. जीवाश्म पंखों की भविष्य की खोजों से हमें ये समझने में मदद मिल सकती है कि डायनासोर और उनके रिश्तेदारों ने उड़ान, गर्म खून वाले मेटाबॉलिज्म को कैसे विकसित किया.

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